चना में तेजी ,बीकानेर मंडी आज का मोठ इशबगुल  मूंगफली ग्वार मूंग चना सरसों गेहूं आदि के भाव बीकानेर 7 फरवरी 2024

राजस्थान हरियाणा की प्रमुख मंडियों के भाव देखने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहे ।
किसान भाइयों राजस्थान हरियाणा की प्रमुख मंडियों (नोखा बीकानेर नागौर गंगानगर हनुमानगढ़ आदि)के भाव देखने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहें हमारी कोशिश रहती है कि दिन भर होने वाली तेजी मंदीसे आपको अवगत करवाते रहें सीजन की शुरुआत हो चुकी है किस प्रकार आवक रही है किस प्रकार की क्वालिटी आ रही है सभी प्रकार की सूचनाएं आपको हमारी वेबसाइट पर मिलती रहेगी सभी प्रकार के भाव देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर विजिट करें
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आज का नोखा मंडी भाव 07/02/2024

इशबगुल 14000 से 19000

ग्वार 4800 से 5095

मोठ 5500 से 6250

सरसों 4000 से 4500

मुंगफली 4800 से 6100 ,,चुगा 5000 से 5500

चना 5000 से 5550

जीरा 20000 से 24000

मूंग 7500 से 8400

मेथी 5000 से 5600

तिल 12500 से 12600

बीकानेर मंडी भाव 7 फरवरी 2024

बीकानेर अनाज मंडी  भाव


मुंगफली खळा 5000 से 6401


चुगा 4500 से 5700


गेहूं 2300 से 2900


ग्वार 5050 से 5170


मोठ 5400 से 6201


मूंग 7800 से 8801


सरसो 4400 से 4801


चणा 5200 से 5700

बीकानेर मंडी भाव 06/02/2024

बीकानेर अनाज मंडी 06/02/2024 भाव
मुंगफली खळा 4900 से 6501
चुगा 4500 से 5700
गेहूं 2300 से 2900
ग्वार 5000 से 5120
मोठ 5400 से 6201
मूंग 7000 से 8801
सरसो 4400 से 4801
चणा 5200 से 5650
मेथी 4900 से 5400

05/02/2024 बीकानेर मंडी भाव


मुंगफली खळा 5000 से 6401
चुगा 4500 से 5600


गेहूं 2300 से 2700


ग्वार 5000 से 5080


मोठ 5400 से 6201


मूंग 7000 से 8400


सरसो 4400 से 4750


चणा 5200 से 5550 #today #bikanermandibhav

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रेट न मिलने से किसानों का पचास प्रतिशत कपास घर में ही रह गया

06 फरवरी 24

इस साल कपास की खेती कम है. यह सच है कि कपास का उत्पादन यह मानकर किया गया था कि इसकी अच्छी कीमत मिलेगी, लेकिन कीमत बढ़ने के बजाय शुरुआती कीमत गिरती ही नजर आ रही है। मौजूदा कीमत सस्ती न होने के कारण कपास अभी भी कीमत बढ़ने की उम्मीद में किसानों के घरों में पड़ी हुई है।

फिलहाल कपास का भाव मात्र 6500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है. लेकिन किसानों को कपास की सरकारी खरीद के बारे में कोई जानकारी नहीं है. भाव नहीं मिलने से 50 फीसदी कपास कीमत बढ़ने के इंतजार में घर में पड़ा है।

इस वर्ष राज्य में 42 लाख 40 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती की गई। नासिक, नगर, बुलदाना, अकोला, वाशिम, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, चंद्रपुर, धुले, नंदुरबार, जालना, जलगांव, बीड, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, परभणी, हिंगोली जिलों में कपास का क्षेत्र अधिक है।

अधिकांश कपास किसान दिसंबर और जनवरी में ही कपास बेचते हैं। पिछले साल कपास की कीमत 5 हजार से 12 हजार तक पहुंच जाने के कारण किसानों ने इस उम्मीद में उन्हें बाजार नहीं दिखाया कि इस साल कपास की कीमत बढ़ेगी.

नवंबर में 6,000 रुपये प्रति क्विंटल से शुरू हुई कपास की खरीद दिसंबर में बढ़कर 6,800 रुपये और जनवरी में 6,700 रुपये होने से किसान चिंतित थे। दाम न मिलने के कारण कपास नहीं बिक पाने के कारण पचास प्रतिशत से अधिक कपास अभी भी किसानों के घरों में पड़ा हुआ है।

कपास पर कीट
कपास की कीमत बढ़ने की उम्मीद में घर में रखी कपास पर एक विशेष कीट का प्रकोप होने से अंगों पर दाग, खुजली, सूजन, बुखार दिखाई दे रहा है। भाव कम होने पर कपास को घर से बाहर निकालना पड़े और भंडारित करना पड़े तो स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाता है, किसान दोहरे संकट में फंस गया है।

हालात पिछले साल से भी ज्यादा कठिन हैं
राज्य में मराठवाड़ा, विदर्भ, नगर, सोलापुर क्षेत्रों में कपास का क्षेत्र अधिक है। पिछले साल शुरुआती दौर में कपास को ग्यारह हजार तक का रेट मिला था। लेकिन कपास की कीमत इससे भी अधिक बढ़ने की आशंका के चलते किसानों ने कपास को घर में ही जमा कर रखा है. लेकिन दरें बढ़ने की बजाय कम हो गईं.

कई किसानों को कपास सात से साढ़े सात हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बेचना पड़ा. कुछ किसानों का कपास जून-जुलाई तक घर में ही पड़ा रहा. इस साल तो स्थिति और भी गंभीर हो गयी है. फिलहाल कपास का भाव पिछले साल से एक से डेढ़ हजार रुपये प्रति क्विंटल कम मिल रहा है.

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